चरखा आर्थिक उत्‍पाद का साधन है तो साइकिल आर्थिक बचत का

श्रीकांत सिंह

भारतीय राजनीति में आज उस चरखे पर चर्चा और साइकिल पर परिचर्चा हो रही है जिसे हम तकनीकी विकास के दौर में बहुत पीछे छोड़ आए थे। चरखा सौ साल पहले अस्तित्‍व में आया था तो साइकिल का आविष्‍कार लगभग पौने दो सौ साल पहले हुआ था। वैसे, इन्‍हें नोटबंदी के दौर में याद किया जाना चाहिए था, क्‍योंकि चरखा आर्थिक उत्‍पाद का साधन है तो साइकिल आर्थिक बचत का। चरखा एक कैशलेस व्‍यवस्‍था भी है। चरखे से सूत कात कर गांधी आश्रम में जमा किया जाता है तो वहां से बिना नकदी के कपड़ा मिल जाता है। कपड़े के अलावा दूसरे सामान भी सूत के बदले मिलते हैं।